बारिश डुबोता है।
कक्षा में हिंदी के अध्यापक कविता शुरू करते हुए कहते है....
कवि कहते है "बारिश ने शहर को भिंगो दिया"
अभिनव हाथ उठाते हुए सवाल करता है....
सर... बारिश भिंगोता नहीं डुबोता है!
अध्यापक.. नहीं बेटा अभिनव बारिश भींगोता है।
अभिनव.. सर लेकिन हमारा पूर्णिया तो डूब जाता है।
अध्यापक पूरी तरह से चुप हो जाते है। हिचकिचाते हुए बोलते है.. बैठ जाओ।
बारिश एक बार फिर पूर्णिया वासियों को रुला रहा है।
लाइन बाजार, न्यू सिपाही टोला, मधुबनी, भट्ठा बाजार, बस पड़ाव, सुदीन चौक, ततमा टोली, नवरतन हाता, बाड़ी हाट, सुभाषनगर, माधो पाड़ा, माता स्थान चौक से मधुबनी चौक जाने वाली सड़क हो या डालर हाउस चौक से चुनापुर घाट जाने वाली सड़क सब डूब चुके है।
गाड़ी वाले हो या पैदल सब पानी में हेल रहे हैं। लोगों ने जो घर का कचरा बाहर फेंके थे तैर के घर में वापस आके पनाह मांग रहा।
सड़क जिसे तोड़ कर नाला बनवाया जा रहा था. अब उन्हीं नालों ने सड़क को अपने अधिकारक्षेत्र में ले लिया है।
बैंक मैनेजर साहब ने नई कार ली थी, सब्जी वाला ठेला सड़क पे पानी में लगाए मैनेजर साहब को सब्जी दे रहा था। साहब कार कि तरफ देखते हुए बोले कार की जगह नाव ले लेता तो बेहतर होता। सब्ज़ी वाला समझ तो नहीं पाया क्या बोला साहब ने लेकिन वो हंस जरूर दिया।
सुना है शहर का निगम बोर्ड भंग हो गया है, लो अब इन परेशानियों की शिकायत करवाने कहां जाएं?
इतना सोच ही रहा था कि एक लड़का अपने मां के साथ बाइक लिए पानी में आ रहा था अचानक गढ़ा आ गया दोनों पानी में गिर गए। सब्ज़ी वाले ने दौड़ के दोनों को उठाया। मां बेटे को डांटने लगी हम कहे थे हमको उतर जाने दो तुम अकेले लेके आओ बाइक तुमको ही नहीं समझ आया ना... लड़का बोला हम क्या करे गढ़ा था।
समाजसेवी, पत्रकार और कई शहरवासी जलजमाव कि समस्या लिए विधायक, सांसद, नगर आयुक्त और जिला पदाधिकारी के दफ़्तर के चक्कर काट रहे।
अधिकारी कह रहे शहर में ड्रेनेज सिस्टम बहाल करना होगा। ख़ैर ये बात तो सबको पता है क्या करना चाहिए? बस लोग ये तय नहीं कर पा रहे कौन करेगा।
सबसे बड़ी परेशानी तो स्कूली छात्रों को है, रोज स्कूल जाना है। वो भी पूरे यूनिफॉर्म में अगर बिना जूते के गए तो अध्यापक से कौन बचाएगा। अब सड़क पानी से भरा पड़ा है फ़िर क्या करे जूता हाथ में लिए, पैन्ट को घुंटने से ऊपर तक उठाए सड़क को पैर से टोहटे गंदे पानी में चले जा रहे। कल ही जीवविज्ञान के अध्यापक ने पढ़ाया था गंदे पानी से दूर रहना चाहिए गंदे पानी में लाखो हानिकारक सूक्ष्मजीव होते है। जिनके संपर्क में आने से हमें कई जानलेवा बीमारियां हो सकती है।
इतने में एक छात्र पानी ने गिर गया उसके सहपाठी देख के हंसने लगे बेचारे बच्चा रोता हुआ वापस घर को लौट गया।
व्यवसाय, दुकानें, मजदूरों के रोज की कमाई सभी चीजों पर इस पानी का बुरा असर होता है। वहीं किसान चाहता है वो इन सभी पानी को अपने पास रख ले ताकि जब जरूरत हो अपने प्यासे फसलों को पिला सके।
तीन महीने पहले बिहार के डिप्टी सीएम ने कई बार पूर्णिया में बैठक कि थी और अधिकारियाें सेे कहा था कि पिछले साल भारी बारिश होने से लोगों को काफी परेशानी हुई थी। इस साल मानसून शुरू होने में कुछ माह बचे हुए हैं। पिछले साल जैसा हाल नहीं हाेना चाहिए।
अब अधिकारियों ने कितना काम किया है ये शहर वाले स्वयं देख रहे है। शहर वाले सड़को पे आके धनरोपनी कर रहे।
स्मार्ट सिटी पूर्णिया सही मायनों में तब स्मार्ट दिखता है जब कोई बाइक के लेगगार्ड पे पैर टिकाए पानी उड़ाते सड़क से गुजरता है।
चलिए हम सब साथ में एक सुर में गाते हैं।
"इस दर्द-ए-दिल कि सिफारिश
अब कर दे कोई वहाँ
कि फ़िर ना आए ऐसी बारिश
जो डुबो दे पूरी तरह"
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