पूर्णिया से हवाई जहाज

दीनानाथ जी, बनेश्वर, हरिया, रामू और चमका दुवार पे बैठ के चाय पी रहे थे।


तभी दूर से राजेंद्र उरांव का बेटा बबलू साइकिल से अखबार लाते दिख गया। बबलू को B.sc से स्नातक पास किए तीन साल बीत चुका है। और कॉलेज कि मेहरबानी से तीन साल का कोर्स पांच साल में पूरा हुआ है, अभी कॉम्पिटीशन की तैयारी कर रहा। पढ़ाई के लिए पिता जी ने कर्ज लिया था जिसके बदले जमीन गिरवी पड़ा है। अब घर की मजबूरियां देख कर बबलू अख़बार बेचने लगा है, जिससे घर वालो की मदद भी हो जाती है और खाली वक्त में पढ़ाई भी जारी रख सकता है।


अख़बार देखते ही दीनानाथ जी अपने पोते को आवाज देते है पिंकू " पोता दौड़ के जाओ अख़बार ले आओ" पिंकू अख़बार लेने दौड़ता है। 


तभी सब देखते है रामानंद जी अपनी पत्नी के साथ वापस आ रहे। 


चमका बोलता है, अरे रामानंद काका काहे वापस आ रहे हैं सुबह 4 बजे ही स्टेशन गए थे। जोगबनी का ट्रेन पकड़ने के लिए क्या हुआ वापस आ रहे है? 


बनेश्वर आवाज देते है... क्या हुआ रामानंद वापस काहे आ गए। ट्रेन छूट गई क्या?

 

नही भईया ट्रेन कहां छूटी हम तो चार बजे ही निकल गए थे ट्रेन पकड़ने के लिए लेकिन ट्रेन में इतनी भीड़ थी की बौगी में घुसने तक का जगह नहीं था, ट्रेन एक सवारी बहुत, पहले तो चार पांच ट्रेन चलती थी अब तो रेलवे के पास इतनी कमी है ट्रेनों की बस एक दो ही चलती है। अब फ़िर शाम में जाएंगे किस्मत आजमाएंगे। 


तभी हरिया कहते हैं.. कोर्ट वाले स्टेशन पे तो कम ही ट्रेन रुकती है। अब लोग चैन पुलिंग करके ही काम चला रहे।  


दीनानाथ जी अख़बार पढ़ते हुए बोलते है... दरभंगा में हवाई जहाज से दूर राज्यों में भी बिहार का शाही लिची भेजा जा रहा। और पूर्णिया ट्रेन भी नहीं मिल रहा।

चुनाव के वक्त तो नेताओं के सारे भाषणों में बस एक ही बात होती थी... हमे वोट दीजिए हम जीतते ही सबसे पहले आपके यहां हवाई अड्डा बनवा देंगे, इतने ट्रेन चलवा देंगे।

 

इसी बात पे रामानंद कहते है... दो चार ट्रेन ही दे दे तो मेहरबानी होगी। 


रामू जी दीनानाथ जी से एक पन्ना अख़बार का लेते हुए कहते है.. मेरे पिता जी ने देखी थी हवाई जहाज को जमीन पे जब 1934 में अंग्रेजों ने लाया था हवाई जहाज।


तभी दीनानाथ जी का छोटा बेटा रमेश आ जाता है जो पटना में पढ़ता है और रामू जी से कहता है... सच में काका आपके पिता जी ने देखा था जब अंग्रेजों ने पूर्णिया शहर से माउंट एवरेस्ट के लिए उड़ान भरी थी। 

अंग्रेजों ने माउंटर एवरेस्ट की 33 हजार फीट ऊंचाई मापी थी। यहीं डगरूआ के लाल बालू में फ्लाइंग बेस तैयार किया गया था। 


रामू जवाब देते है.. हां बेटा पिता जी ने देखा था। हमको बताये थे हवाई जहाज जमीन पे दौड़ते हुए आसमां में कूद गया और उड़ कर बादलों में चला गया। हम तो आज तक आसमान में उड़ते ही देखे है। 


दीनानाथ जी कहते है.... रामू तुम भी देख लेना हवाई जहाज उसपे बैठ भी जाना, पूर्णिया में हवाई अड्डा बनने वाला है लेकीन भूमि अधग्रहन का मामला कोर्ट में है। कब तक क्लियर होगा भगवान ही जाने। सब तो नेतागिरी में ही लगे है वादे ही वादे किए जा रहे। रोज चिट्ठी ही लिख रहे हैं लेकिन बात आगे नहीं बढ़ रहा। 2015 में ही तो मोदी जी ने चुनापूर सैनिक हवाई अड्डा को विकसित कर सिविल हवाई अड्डा बनाने का घोषणा किए थे, लगता है अब और दो तीन साल इंतजार करना पड़ेगा। 

बहुत लोग रोज पूर्णिया से दरभंगा ने तो सिलीगुड़ी जाते है। हवाई जहाज से दिल्ली मुंबई जाने के लिए। 


तभी चमका उठ के कचिया लेके घास काटने जाने लगता है और कहता है.. दीनानाथ चा हम जाते है हमरे लिए क्या हवाई जहाज क्या ट्रेन हमरे लिए तो बस यही साइकिल यही गोड़... हम मरेंगे तो हमरा बेटा को मिलेगा ये साइकिल जैसे मेरे बाप के मरने पे मुझे मिला। बोलते हुए साइकिल लेके चला जाता है।

 

रामू बोलते है... पूर्णिया में हवाई अड्डा शुरू होने से सीमांचल और कोसी के आस पास के जिलों के लोगों को कितना लाभ मिलेगा। सबको अभी दिल्ली जाने के लिए बागडोगरा जाना पड़ता है। कितना पैसा तो भाड़ा में ही चला जाता है और बहुत समय भी लगता है और फिर काम धंधा भी बढ़ेगा।


रमेश बोलता है... हम और मेरे साथियों ने एक साथ संगठन बना कर ट्विटर पे ट्रेंड करवा रहे है लाखों लोगों ने हमारा समर्थन किया है। #PurneaAirportLA 

प्रशासन भी कोशिश कर रहा है। यहां के डीएम सर ने भी कहा है वो और उनकी टीम तेजी से इसके लिए काम कर रही है।


तभी दीनानाथ जी अख़बार रखते हुए... ये अभी के जो जिला कलेक्टर हैं बहुत कर्मठ अधिकारी हैं कुछ दिन पहले जो कोरोना महामारी में ऑक्सीजन का जो कमी हो गया था पूर्णिया में, कलेक्टर साहब ख़ुद सदर अस्पताल पहुंच गए और जब तक ऑक्सीजन का आपूर्ति नहीं हुआ चैन से नहीं बैठे। इनके ही अभियान से तो पंचायत में पुस्तकालय बना है.. अभी जो अभियान चल रहा "किताब दान" वाला इन्होंने ने ही शुरू करवाया है। कल चमका की बेटी रानी वही बैठ के पढ़ रही थी। तुमलोगों के पास भी किताबे है तो दान कर आओ पुस्तकालय में।


बनेश्वर.. हां.., मेरे भी बच्चे वहां पढ़ने जाते है। 


बनेश्वर रमेश से पूछते हुए.. बेटा रमेश ई टुटर क्या होता है?


रमेश... काका ये माध्यम है जिसपे आप सरकार और नेता लोग के सामने अपने मांगो और समस्याओं को रख सकते है। यहां पर मीडिया और बहुत लोगो का समर्थन भी मिलता है।


बनेश्वर... मेरा आवास का पैसा ने मिला है और डीलर का मशीन में अंगूठा ने लेता है तो अनाजो भी ने मिलता है। कहो सरकार को मेरा ठीक करवा दे सब समस्या।


रमेश... हां काका लिख देते है हम, बहुत लोग मदद करेगा।

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