गांधी भूत से भविष्य तक
भारत क्या है, एक देश, एक बाजार, नहीं भारत एक ख़्वाब है,एक सपना, जहां हर कोई अपने रंग में खुश और खिलखिलाता दिखता है। ये गांधी का हिन्द स्वराज है। आज़ादी से 20 वर्ष पहले ही गांधी जी ने खुद को कांग्रेस से अलग कर के भारत के पुनः निर्माण में रचनात्मक कार्यों में वर्धा वास में रहकर जूट गए, गांधी के बनाए ढांचों को आज मोदी सरकार सारे रूप में अपना रही है। स्वदेशी, बेसिक शिक्षा, सब गांधी की नीतियां है। गांधी भारत का भूतकाल भी है, वर्तमान भी है, भविष्य भी है। गांधी व्यक्ति नहीं है ये एक प्रयोगशाला है, जिन्होंने ढेरों परिणाम दिए, बिना किसी नोबेल पुरस्कार के , गर्व से कह सकते है आप हमारे राष्ट्रपिता है।
गांधी भगवान नहीं थे उन्हें इस बात से गुस्सा भी आता था जब कोई उन्हें भगवान कहता था। मेरा मानना है वो एक किताब है, जहां आपको कोशिका से बना इंसान उन सभी दर्शनों से जुड़ जाता है जो लगता था ये सब तो ईश्वर ही कर सकते है, गांधी ने ईश्वर को प्रकृति से खींच कर अपने हृदय में बसाना सिखाया।
कुछ लोग कहते है गांधी ने हमे आज़ादी नहीं दिलाई, वो लोग गांधी को बस महज एक नेता के रूप में देखते है। आज़ादी के लिए गांधी के योगदानों की बात करते है, वो लोग डरे हुए है उन्हें डर है कहीं गांधी भविष्य में भी ना हो, इसलिए उन्हें इतिहास के सवालों के कटघरे में खड़ा करना चाहते है, जिसमें हरबार वो विफल हो जाते है, गांधी के चश्मे से भविष्य दिखता है। गांधी वो विचार है, जो भविष्य में घटने वाली हर घटना जो मनुष्यता से जुड़ी होगी उसमे होंगे, यही है गांधी ज्योत्षी। भारत की आज़ादी, और भारत के निर्माण में गांधी को हर कटघरे में खड़ा करना चाहिए क्योंकि जितनी बार उनकी बेड़ियां गांधी को एक सांचे में बांधेगी उतनी बार गांधी के विचार की ऊर्जा उसे तोड़ कर पूरे विश्व को प्रकाश दे जाएगी।
मेरे लिए गांधी प्रयोगशाला है, जहां आप बड़े बड़े दर्शनों का प्रेक्टिकल परिणाम देख सकते है।
हां महात्मा की बात फ़िर कभी.......................
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